कौवा और चिड़िया की कहानी | Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani | Story Of Crow And Bird
तुम बच्चों आज हम कौवा और चिड़िया की कहानी Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani Story Of Crow And Bird पढ़ेगे
कौवा और चिड़िया की कहानी Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani Story Of Crow And Bird
एक जंगल में एक चिड़ियाँ रहती थी | उसने एक पेड़ की डाल पर अपने लिए घर बनाया था | वो और उसके बच्चे उस घर में रहते थे | अचानक बारिश का मौसम आ गया और बहुत तेज बारिश होने लगी | चिड़िया बेचारी कही बाहर नहीं निकल पा रही थी | एक दिन रात को बहुत तेज हवाएं चलने लगी | जिसकी वजह से चिड़िया का घर कहीं दूर जाकर गिर पड़ा | चिड़िया और उसके बच्चे बारिश में पूरी तरह से भीग चूके थे | बेचारी उस चिड़िया को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें | फिर चिड़िया ने अपने बच्चों को लेकर पास ही रहने वाले एक कौवे के घर गई | और उसके घर का दरवाजा खटखटाया |
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चिड़िया बोली : कौवा जी क्या तुम्हारे घर में हमें थोड़ी देर की जगह मिलेंगे | बारिश के कारण | मेरा घर उड़ गया हैं मेरे बच्चे बारिश में भीग रहे हैं दरवाजा खोलो |
कौवा बोला : तो मैं क्या करूँगा |
चिड़िया बोली : बारिश के रुकने तक | हम तुम्हारे घर में रुकेंगे दरवाजा खोलो मेरे बच्चे बहुत काप रहे हैं |
कौवा बोला : मेरे बच्चे भी | अभी अभी सोए है अगर मैं दरवाजा खोल दूंगा तो ठंडी हवा की वजह से वो जाग जाएंगे | मैं दरवाजा नहीं खोल सकता |
इस तरह उस कौवे ने जवाब दिया और दरवाजा भी उसने नहीं खोला | बेचारी चिड़ियाँ अपने बच्चों को लेकर वहाँ से चली गई | कुछ दिन गुज़रने के बाद एक दिन चिड़िया के घर का दरवाजा किसी ने खटखटाया था |
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चिड़िया बोली : कौन है |
कौवा बोला : चिड़िया मैं कौवा हूँ | मेरा घर बारिश और हवा की वजह से टूट चुका है | मेरे बच्चे बारिश में भीग रहे हैं दया करके दरवाजा खोलो | आज की रात हम तुम्हारे घर में रुकेंगे |
चिड़िया बोली : ठीक है कौवा जी आप अंदर आ जाओ | यह कहकर चिड़िया ने अपने घर का दरवाजा खोला और फिर | कौवे ने अपने बच्चों को लेकर अपने पंखों में छुपाकर सुला दिया था | कुछ दिन पहले चिड़िया के साथ किए बर्ताव | कौवा को याद आया और वो बहुत शर्मिंदा हो गया |
कौवा बोला : मुझे माफ़ कर दो चिड़ियाँ | इसी हालत में | जब तुम मेरे पास आई थी तब मैंने तुम्हें मेरे घर में आने नहीं दिया और ना ही दरवाजा खोला था लेकिन तुमने | मेरे बच्चों को और मुझे अपने घर में जगह दी | तुम्हारा ये एहसान मैं अपनी जिंदगी में कभी नहीं भूलूंगा |
चिड़िया बोली : कोई बात नहीं कौवा जी जब तक आप अपना घर नहीं बना लेते तब तक यहीं रुक जाओ | क्योंकि मैं बहुत अच्छी तरह जानती हूँ कि ऐसी परिस्थिति में कैसा होता है | आप बिल्कुल चिंता मत करो |
कौवा बोला : चिड़िया तुम कितनी अच्छी हो | मैंने तुम्हारी कोई मदद नहीं की लेकिन फिर भी तुमने मेरा पूरा साथ दिया | आज से | मैं तुम्हारा अच्छा दोस्त बनकर रहूंगा और हर मुश्किल वक्त में तुम्हारा साथ दूंगा |
इस तरह कौवा और चिड़िया एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए | कौवे के चिड़िया को सहायता ना करने के बावजूद भी चिड़िया ने कौवे की पूरी मदद की | अपनी अच्छा ई साबित कर ली |
इसलिए बच्चो | हमारी मदद करने वाले की ही नहीं | बल्कि हमारी मदद ना करने वाले की भी हमें मदद करनी चाहिए | तभी वो हमारा भी साथ देते है | आपको पता है प्यार वो चीज़ है जो गुस्सा और नफरत को भी प्यार में बदल देती है | अगर हम किसी की मदद नहीं करेंगे | तो हमारी भी कोई मदद नहीं करेगा हर कोई | चिड़िया के जैसा अच्छे मन वाला तो नहीं होता
दूसरी कौवा और चिड़िया की कहानी | Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani | Story Of Crow And Bird
कौवा और चिड़िया की कहानी Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani Story Of Crow And Bird
एक समय की बात है, जबकि एक हरित और फलदार बाग़ के किनारे एक छोटे से गाँव में एक कौवा और एक चिड़ीया ने अपनी अद्वितीय दोस्ती की कहानी रचने का निर्णय किया। यह एक ऐसी कहानी है जिसमें सफलता, साझेदारी, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से दोस्ती का महत्व बताया गया है।
गाँव में सबको अपने-अपने कामों में लगाव था, लेकिन कौवा और चिड़ीया ने एक-दूसरे के साथ एक अजीब सी बातें करते देखी थीं। कौवा, जो हमेशा ऊचाईयों से गिरता रहता था, एक दिन चिड़ीया के साथ मिला।
"नमस्कार चिड़ीया! कैसे हो तुम?" कौवा ने हंसते हुए पूछा।
"मैं ठीक हूँ, शुक्रिया। तुम कैसे हो?" चिड़ीया ने प्रशन का उत्तर दिया।
"मैं भी ठीक हूँ, लेकिन मेरा दिल कह रहा है कि हमें कुछ अद्वितीय करना चाहिए, कुछ नया और रोमांटिक," कौवा ने बताया।
"वाह! यह सुन्दर लगता है। लेकिन हम क्या कर सकते हैं?" चिड़ीया ने उत्साह से पूछा।
इसके बाद, कौवा ने एक सप्ताह की योजना बनाई, जिसमें वे मिलकर अलग-अलग स्थानों का आनंद लेने का निर्णय लिया। वे हर रोज एक नया स्थान चुनेंगे और वहां की सुंदरता को देखकर खुशी का अनुभव करेंगे।
पहले दिन, वे एक ऊँचे पहाड़ी पर पहुँचे, जहां से उन्होंने सुनसान गाँव की पूरी दृश्यमान सुंदरता को देखा। समीप की झील ने छाया बनाया हुआ था और उनकी चिरपिंग से गुनगुनाहट गूँथ रही थी।
"चिड़ीया, यहां तो कुछ अद्वितीय है! हमने सही समय पर सही स्थान पहुँचा है," कौवा ने खुशी के साथ कहा।
चिड़ीया ने भी मुस्कराते हुए कहा, "तुम सही कह रहे हो, कौवा। यहां की सुंदरता ने हमारे दिलों को छू लिया है।"
इसके बाद, वे गाँव में वापस आए और अपने दोस्तों को उनके यात्रा के बारे में बताए। उन्होंने देखा कि वहां और भी कई सुंदर स्थान हैं, जो लोगों को देखना चाहिए।
"कौवा और चिड़िया की कहानी Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani Story Of Crow And Bird" गाँव के लोगों के
बीच एक चर्चा का केंद्र बन गई। लोग उनके साथ जुड़कर नए स्थानों का आनंद लेने लगे और दोस्ती की महत्वपूर्णता को समझने लगे।
इस कहानी ने दिखाया कि जिंदगी में हमें समय-समय पर रुकना चाहिए, सुंदरता को महसूस करना चाहिए और दोस्तों के साथ समय बिताना चाहिए। यह कहानी एक सर्कल को पूरा करती है, जब कौवा और चिड़ीया अपने गाँव में वापस लौटे और उन्होंने अपने दोस्तों के साथ अपने सुंदर अनुभवों को बाँटा।
इसके बाद, वे हर सप्ताह एक नया स्थान चुनने और उसे अपने दोस्तों के साथ साझा करने का निर्णय लिया। इसका आनंद लेना, सुंदरता को महसूस करना और दोस्तों के साथ समय बिताना उनकी जिंदगी को और भी रोमांटिक बना दिया।
इस प्रकार, "कौवा और चिड़िया की कहानी Kauwa Aur Chidiya Ki Kahani Story Of Crow And Bird" ने गाँव के लोगों के बीच एक नया माहौल बनाया और दोस्ती, सुंदरता, और साझेदारी के महत्व को साबित किया। यह कहानी न केवल एक हस्तक्षेप है, बल्कि एक शिक्षाप्रद अनुभव भी है जो हमें यह सिखाता है कि जीवन का हर पल हमें नए और सुंदर दृष्टिकोण से देखने का अवसर देता है।
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